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फाल्गुनी के प्रेमी फाल्गुनी की तड़प ने दशरथ मांझी से ' द माउंटेन मैन ' बना दिया ब्रिटिश हुकूमत ऊपर से जाती का दंश जमींदारी का घूंसा बिगाड़ दिया जीवन का भूंसा  क्या मजाल कि कोई आवाज उठा दे लेकिन दशरथ नाम के क्षत्रिय धारी राम के पिता की तरह  उसका काम तो सेवक की भांति जरा सी चूक लात घूंसे से बात करती सामंतों की पर बेझिझक विद्रोही स्वभाव स्वाभिमानी , अक्खड़ बात - बात पर अकड़ जाने वाली बोली दशरथ को कोयले की फैक्ट्री धनबाद ले गई पर फगुनिया का प्यार खींच लाई गहलोत की नगरी में  जो शाहजहां के ताजमहल को भी फीकी कर दे दशरथ के प्रेम की तड़प ऐसा विस्फोट बना की तीन सौ साठ फीट लंबी पहाड़ को भी चिर दिया और एक नगर बसा फगुनिया के प्रेम का नगर जो इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया। वाईस वर्षों की अथक साधना लोहार की छेनी हथौड़ी और प्रेम की चिंगारी हर प्रहार पर भारी थी कबीर का ढाई आखर प्रेम मुक्ति का कारण बना प्रेम की सही परिभाषा हैं  दशरथ मांझी।                  - विनय विश्वा  शत - शत नमन हमारे पुरखे 14/01/26